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राजपूत छात्रावास भवनों की सुध ले समाज

Thursday, August 15, 20133comments

पिछले कुछ महीनों में राज्य के विभिन्न दौरों के दौरान प्रदेश के कई राजपूत छात्रावासों में जाने का मौका मिला, वहां छात्रों के लिए उपलब्ध सुविधाओं व छात्रावास भवनों की हालात देखने का मौका भी मिला, कई छात्रावासों के भवन मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुकें है ऐसा लगता है जैसे ये भवन बनने के बाद से अब तक कभी उनकी मरम्मत ही नहीं हुई, ऐसे जर्जर भवनों के चलते बरसात आदि मौसम या छोटे मोटे भूकम्प से कभी भी कोई अनहोनी होने का डर स्थाई रूप से व्याप्त है|

जिन छात्रावासों के भवनों की हालात थोड़ी ठीक है वहां छात्रों के लिए अन्य जातिय छात्रावासों की तुलना में सुविधाएँ बहुत कम है या कहीं कहीं पर नहीं के समान है|

यदि हम अपने समाज की नई पीढ़ी को अपना भविष्य सँवारने के लिए शिक्षा हेतु सुविधाएँ नहीं दे सकते तो फिर नई पीढ़ी से प्रतिस्पर्धा के युग में आगे बढ़ने की उम्मीद कैसे की जा सकती है ? आज जब आरक्षण की व्यवस्था जो हमारे खिलाफ है और हम राजनैतिक रूप से पिछड़े हुए है ऐसे में समाज को आगे बढाने हेतु एक ही रास्ता बचता है शिक्षा का| यदि हमारा समाज इसी क्षेत्र में पिछड़ गया तो हम अपनी सामाजिक स्थित से कभी उबर नहीं पायेंगे|

एक तरफ समाज द्वारा संचालित छात्रावासों की हालात दयनीय है वहीँ बालिकाओं के लिए छात्रावासों की नितांत कमी है, यही कारण है कि हमारे समाज की गांवों में रहने वाली बालिकाएं अन्य समाज की बालिकाओं से शिक्षा के मामले में पीछे रह जाती है, यदि ग्रामीण राजपूत बालिकाओं को शिक्षा के लिए शहर में रहने हेतु सुविधाजनक और सुरक्षित आवास व्यवस्था उपलब्ध हो तो हमारे समाज की बालिकाएं आज हर क्षेत्र में आगे हो सकती है, बालिकाओं के लिए छात्रावास हेतु यदि समाज अपने शहर में भूमि उपलब्ध करवा दे तो उस भूमि पर छात्रावास भवन बनवाने की जिम्मेदारी मैं स्वयं लेता हूँ|

अत: आईये हम सब मिलकर अपनी नई पीढ़ी को अच्छी व समुचित शिक्षा ग्रहण करने के लिए उन्हें सुविधाएँ मुहैया कराने वाली संस्थाओं यथा राजपूत छात्रावासों जो समाज के युवा विद्यार्थियों को अपने घरों से दूर शहरों में शिक्षा के लिए सस्ते व सुरक्षित व सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराते है उनकी देखभाल करें, उन भवनों का नवीनीकरण करें, नये छात्रावास भवन बनवाएं, जहाँ हमारे समाज की आने वाली पीढ़ियों ने रहकर शिक्षा ग्रहण करनी है|

अभिमन्यु सिंह राजवी
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August 15, 2013 at 5:37 PM

अपनी आर्थिक हालत के चलते समाज बड़े बड़े किलो और भवनों का रख-रखाव तो कर सकता लेकिन छात्रावास जैसी संस्थाओं की देखभाल तो कर हिओ सकता है जिनसे उनकी आनेवाली पीढ़ियों का भविष्य जुड़ा है ।

August 15, 2013 at 5:41 PM

Samsya ko samajh kar likha hua ek samayik lekh,jarurat hai samaj ko ekjut hokar kadam uthhane ki....
Kunwar ji,

August 16, 2013 at 3:19 PM

thanx ratansa for taking this issue at an early date.
(a) we need to update services of rajput hostels with photos of all places and need to ask comments from resident student and care takers of hostels.
(b) than plan to upgrade services in a phased manner and
(c) thereafter have a half yearly or yearly meeting to review/monitor the progress.
(d)budget can be contributed in an ac from volunteers depend upon work undertaken.thanx

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